Tuesday, February 17, 2009

अनूठे अध्याय का अभूतपूर्व आरंभ


यह इंदौर के एक अनूठे कलात्मक अध्याय का अभूतपूर्व आरंभ होगा जब शासकीय ललित कला संस्थान की देवलालीकर कला वीथिका कलाकारों, कला प्रेमियों और शहरवासियों के लिए खोल दी जाएगी। इस मौके पर शहर के 80 चित्रकारों के चित्रों की नुमाइश होगी। इसे नाम दिया गया है आरंभ। इसमें नाचती-गाती, सशक्त रेखाएं होंगी, धड़कते और लयात्मक आकार होंगे और मोहित करते तरह- तरह के रूप होंगे। और होंगे अपने चटखपन में प्रफुल्लित और कभी अपनी धूसरता में उदास रंग। यानी रूपों, रंगों और आकारों की एक समूची मूर्त-अमूर्त दुनिया होगी जिसमें शहर के कलाकारों की तूलिका से निकले तमाम तरल रंग ताजगी का अहसास कराएंगे। यही नहीं, कुछ मूर्तिशिल्प भी नुमाया होंगे। आज इसका उद्गाटन करेंगे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। समय तय हुआ है शाम सात बजे। शासकीय ललित कला संस्थान और लोक संस्कृति मंच की यह साझा कोशिश कलाकारों के कई रूप, रंग और आकार संजो लाई है। इसे 23 फरवरी तक दोपहर 4 बजे से रात 8 बजे तक निहारा जा सकता है।
निश्चित ही यह शहर का ऐसा बड़ा कला-आयोजन है जिसमें कल्पना, रंग संगति, संतुलित संयोजन, अभिनव प्रयोगशीलता को मूर्त-अमूर्त में देखा-महसूस किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 28 जनवरी को होना था लेकिन पूर्व राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन का 27 जनवरी को निधन हो जाने से इसे स्थगित कर दिया गया था।
वीथिका के लोकार्पण के साथ ही कलागुरु डीडी देवलालीकर की कांस्य प्रतिमा का अनावरण भी किया जाएगा। ढाई फुट की इस मूर्ति को बनाया है कला संस्थान के प्राचार्य, मूर्तिकार-चित्रकार शशिकांत मुंडी ने। कला वीथिका के आरंभ अवसर के लिए वे कहते हैं कि यह सचमुच संस्थान और शहर के कला जगत के लिए गौरव का क्षण होगा जब यह लोकार्पण होगा। इससे कलाकारों और कला के लिए नए रास्ते खुलेंगे और ऐसा रचनात्मक मौहाल बनेगा जिसमें तमाम शैलियों में काम करने वाले विभिन्न कलाकारों को अभिव्यक्ति के लिए मंच मिलेगा। वे यहां न केवल एक दूसरे से संवाद कर सकेंगे बल्कि रचनात्मक गतिविधियों में योग दे सकेंगे। वीथिका संचालन समिति के समन्वयक शंकर लालवानी कहते हैं कि विरासत को संजोये बगैर संस्कृति और संस्कार की बात करना निरर्थक है। लिहाजा हमने इस कला वीथिका को खत्म होने से बचाने और नया रूप रंग देने का बीड़ा उठाया। आज तमाम लोगों औऱ कलाकारों के सहयोग से इसे हम नया रूप-रंग देने में कामयाब हुए हैं। कोशिश रहेगी कि यहां लगातार रचनात्मक गतिविधियां जारी रह सकें।
इस प्रदर्शनी में शहर के सबसे वरिष्ठ चित्रकारों में श्रेणिक जैन, मिर्जा इस्माइल बेग से लेकर मीरा गुप्ता शामिल हैं। श्रेणिक जैन अपने मनोहारी लैंड स्केप के लिए ख्यात हैं जबकि मीरा गुप्ता अपने सधे पारंपरिक काम के साथ मौजूद हैं। ईश्वरी रावल अपने मालवी रंगों में अपने अमूर्त चित्र के साथ, बीआर बोदड़े अपनी अमूर्त शैली में प्रयोगशीलता के साथ तो प्रभु जोशी जलरंगों में अपनी दक्षता के साथ मौजूद हैं। हरेंद्र शाह, रमेश खेर से लेकर राजेश पाटिल, विशाल जोशी और मोहित भाटिया, शबनम, रवीन्द्र व्यास ने अपनी कल्पना को काले, भूरे, लाल और हरे रंग में चित्रित किया है। सुशीला बोदड़े और मधु शर्मा ने स्त्री के संसार की अंतरंग छवियां चित्रित की हैं तो प्रदीप कनिक और आलोक शर्मा ने आकृतिमूलकता में अपने रंग बिखेरे हैं। ख्यात मूर्तिकार संतोष जड़िया, शशिकांत मुंडी, खांडेराव पंवार, देवीलाल पाटीदार, प्रकाश पाटीदार और मुदिता भंडारी ने अपने भिन्न माध्यमों में सुघड़ आकार गढ़े हैं। कुल मिलाकर श्री जैन से लेकर युवतम कलाकार गरिमा पंड्या और सारंग क्षीरसागर जैसे कलाकारों के चित्र देखे जा सकेंगे। इसमें सभी कलाकार और कलाकार प्रेमी आमंत्रित हैं।
(पेंटिंग ः बीआर बोदड़े)

3 comments:

विनय said...

इस बारे में पहले से जानकारी देने का शुक्रिया!

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चाँद, बादल और शाम

डॉ .अनुराग said...

painting is beautiful.

विष्णु बैरागी said...

अच्‍छी खबर दी आपने। यह तो पर्व-प्रसंग है। सबको बधाइयां और आपको धन्‍यवाद।
जगह तो वही होगी-सर्वोदय साहित्‍य भण्‍डार के पास वाली।
23 फरवरी से पहले वहां कम से कम एक बार पहुंचना चाहूंगा-भने ही मुूझे 'कला और कला-कृति' की समझ नहीं है।