Wednesday, December 17, 2008

एक मारक, मोहक और मादक सम्मोहनः शकीरा


फिदा होना मेरी फितरत है और जिन पर फिदा हूं उनकी फेहरिस्त ज्यादा लंबी नहीं है। इस फेहरिस्त के छोटे-छोटे फासलों पर कुछ फनकार हैं जिनके फन में फनां होने का मन करता है। मैं दो कारणों से कोलंबिया पर फिदा हूं। यहां दो महान शख्सियतें हुईं। एक अदबी और दूसरी मौसिकी की। दोनों ही अपने फन के माहिर फनकार। दोनों की अदा सबसे अलहदा। दोनों ही जादुई। एक अपनी भाषा और कल्पना के जादुई यथार्थ या यथार्थ की जादुई कल्पना में जवां तो दूसरा अपने सुर और नाच में रवां। माय गॉड क्या हुनर पाया है दोनों ने। एक हैं हमारे गाबो यानी गैब्रियल गार्सिया मार्केज, हरदम अपनी कला के जिगर से भाषा, कल्पना और यथार्थ का ऐसा अद्भुत रसायन बनाते हुए जिसका आस्वाद ऐसा गूंगा बना देता है जिसने गुड़ चखा हो। और दूसरी हैं शकी यानी शकीरा। शकीरा इसाबेल मेबरिक रिपोल।

जहां गाबो अपने मैजिकल रियलिज्म के लिए मशहूर हैं तो दूसरी के बारे में मुझे कहने दीजिए अपने रियल मैजिकलिज्म के लिए।

मैं एक बार फिर शकीरा की ओर लौटा हूं। ३१ साल की जवानी में उसका जलवा इतना जानदार है कि वह जब थिरकती है तो लगता है एक कौंध मचलती-उछलती नाच रही है। उसकी थिरकन में बदन की बल खाती बिजलियां एक लपट की तरह आपको लपकने की कोशिश करती लगती हैं। उसका नाच एक अंतहीन आंच का आगोश है। उसकी आवाज आबशार की तरह आपको ठंडी राहत देती है तो कभी अंगारे की आंच का अहसास भी कराती है। कई बार उसकी आवाज अपनी मखमली अंगुलियों से आपकी रूह को गुदगुदाने लगती है तो कभी अंगुली पकड़कर आपको इश्क के बियाबान में भटकने के लिए छोड़ आती है। उसको गाते-नाचते देखता हूं तो उसके बदन की लयात्मक हरकत से ज्यादा उसकी उस कल्पनाशील रचनात्मकता पर फिदा होता हूं जिसके जरिए वह ऐसा मारक, मोहक और मादक सम्मोहन रचती है।

यह ऐसे ही संभव नहीं हुआ।

जब वह चार साल की थी उसके भाई की अचानक मौत हो जाती है। उसके लिए यह जीवन का पहला सदमा। चार साल की उम्र में इस सदमे से मिले दुःख को वह कविता में ढालती है और उसका यह दुःख कविता में कोंपल की तरह फूट कर अपनी नन्ही हथेलियां हिलाता है। आठ की होते-होते वह एक गीत रचती है, इसे अकेले में गुनगुनाती है। एक दिन अचानक एक रेस्त्रां में टेबल पर नंगे पांव नाचने लगती है। सब अवाक। ११ की उम्र में गिटार पर उसकी अंगुलियां फिसलने लगती है और फिजां में मीठी स्वर-लहरियां गूंजती हैं।

बस यहीं से वह सांगीतिक सफर शुरू होता है जिसमें सुंदर गीत हैं, दिल को छू लेने वाले बोल हैं, शांत और उद्दाम संगीत है और साथ ही चमत्कृत कर देने वाला लचकता नाच भी है। फिर क्या, शकीरा ने लिखी शोहरत के शिखर पर कामयाबी की नई इबारत। पैसों की झमाझम बारिश और आलीशान जीवन की चकाचौंध। आज वह कोलंबिया की सबसे ज्यादा धन कमाने वाली गायिका बन गई है। फोर्ब्स ने उसे दुनिया की चौथी सबसे अमीर गायिका घोषित किया है। वह ३८ मिलियन डॉलर सालाना कमाती है। फ्लोरिडा में साढ़े छह हजार फीट पर बना आलीशान भवन उसे अब छोटा लगता है।

वह रॉक एन रोल की दीवानी है, उसे अरेबिक संगीत मोह लेता है, बैली डांस की अदाएं उसकी प्रेरणाएं बनती हैं। वह द बीटल्स, द पोलिस, द क्योर और निर्वाणा जैसे बैंड से बेहद प्रभावित है। उसके संगीत और नाच में दुनियाभर के संगीत की खूबियों का संतुलित रसायन मिलेगा जिसका आस्वाद सिर्फ शकीरा के गीत-संगीत में ही पाया जा सकता है। वह तो कहती भी है कि मैं रॉक म्यूजिक से प्यार करती हूं लेकिन मेरे पिता सौ फीसदी लेबनानी हैं इसलिए मैं अरबी संगीत के स्वाद और ध्वनियों की भी दीवानी हूं। इन्हीं के प्रति मेरा प्रेम और लगाव कई बार मेरे संगीत में फ्यूजन की तरह गूंजता है।

एक प्रोड्यूसर मोनिका एरीजा ११ साल की उम्र में ही शकीरा के टैलेंट को ताड़ लेती हैं और विश्वविख्यात म्यूजिक कंपनी सोनी में आडिशन करवाती हैं। पहले आडिशन में वह फेल हो जाती है लेकिन कुछ समय के अंतराल के बाद उसे तीन एलबम का कॉन्ट्रेक्ट मिलता है। पहले दो एलबम मैजियो (१९९१), पेलिग्रो (१९९३) फ्लॉप हो जाते हैं लेकिन न्यू एस्त्रों रॉक एलबम में उसका योगदान उसे जबरदस्त कामयाबी दिलाता है और फिर तीसरा एलबम पेएस डेस्काल्जोस (१९९५) इतना हिट हो जाता है कि उसकी पचास लाख कॉपियां हाथों हाथ बिक जाती हैं। इसके बाद डोंड इस्तान लॉस लेड्रोंस से और बड़ा एक्सपोजर मिलता है। वह एमटीवी म्यूजिक और ग्रेमी अवॉर्ड हासिल करती है। इतनी ख्याति पाने के बाद उसका अब तक कोई इंग्लिश एलबम नहीं आता है। दुनियाभर के लोगों का दिल जीतने के लिए ग्लोरिया इस्टीफेन की मदद से अपना पहला इंग्लिश एलबम लाती है-लॉन्ड्री सर्विस। इसे अपार लोकप्रियता हासिल होती है। इसकी एक करोड़ तीस लाख कॉपियां बिक जाती हैं और जब २००६ में उसका दूसरा इंग्लिश एलबम अोरल फिक्सेशन (दो वाल्यूम में) आता है तो वह एक अमेरिकन और तीन ग्रेमी अवॉर्ड अर्जित करती है। इस एलबम के गीत हिप्स डोंट लाई तो वह ऐसा गाती और नाचती है कि दुनिया उस पर फिदा हो जाती है। उसका यह एलबम यूएस और यूके चार्ट में अव्वल नंबर पर आता है। इसके बाद शकीरा शकीरा, व्हेनएवर व्हेनएवर आदि गीतों को भी खूब शोहरत मिलती है।

२००७ में वह अपने ही हमवतन दिग्गज उपन्यासकार मार्केज के उपन्यास लव इन द टाइम अॉफ कॉलरा पर इसी नाम से बनी फिल्म में न केवल एक छोटी सी भूमिका निभाती है बल्कि दो गीत लिखती भी है और गाती भी है। वह ऐसी गायिका है जो अपने गीत खुद लिखती है या अपनी साथी गीतकार के साथ लिखती है। उसके गीत हजार तरह से प्रेम करने के लिए स्त्री की पुकार के गीत हैं। उसमें उद्दाम और कोमल इच्छाएं अभिव्यक्त होती हैं। उसके लिखे गीत की एक पंक्ति है-तुम ईश्वर के हाथों लिखे गए गीत हो। कई बार वह प्रेम से लबालब भरे गीतों को गाते हुए लगभग बदहवास सी नाचने लगती है। वह कहती है मेरे प्रशंसक सोचेंगे कि मैं न्यूरॉटिक हूं। मैं तो अॉब्सेसिव कम्पल्सिव परफेक्शनिस्ट हूं। यह उन्हें पसंद है या नहीं मुझे नहीं मालूम लेकिन इतना तय है कि वे मुझे ज्यादा समझने की कोशिश करेंगे। इससे वे समझ पाएंगे कि मेरी जिंदगी का मकसद क्या है? मैं किसके लिए लड़ रही हूं और वह क्या है जो मुझे प्रेरित करता है, मुझे गतिशील रखता है। मैं महसूस करती हूं ऐसा करके मैं अपने प्रशंसकों के और भी करीब आ जाती हूं, जो शायद इसके पहले संभव नहीं हुआ था।वह प्रेम में डूबी है और उसका प्रेम है अर्जेंटीना के भूतपूर्व राष्ट्रपति का बेटा।

खबर है कि वह इन दिनों इटैलियन गायक ताजियानो फैरो के साथ भी गाना गाने वाली है। हाल-फिलहाल वह कार्लोस संताना के साथ अपने नए एलबम इल्लिगल को बनाने में मसरूफ है।

उसका मानना है कि जिदंगी में ऐसे पल आते हैं जब जिंदगी खुद को सरल करती है और तब हम अपनी हथेलियों में भाग्य के बारे में कुछ भी नहीं पूछते। और हम फिर अपनी मनपसंद कविताएं पढ़ना शुरू करते हैं और कभी कभी अपनी कविताएं लिखने का साहस । हम हमेशा फिर-फिर प्रेम में डूबने लगते हैं...

दिलचस्प-दिलकश शकीरा

१।मैं सोचती हूं मेरे बदन का सबसे खूबसूरत अंग मेरा दिमाग है।

२। मुझे जेवर बिलकुल पसंद नहीं, मेरी सेहत ही मेरा जेवर है।

३। औरतें कभी संतुष्ट नहीं हो सकती क्योंकि पुरुषों के मुकाबले वे ज्यादा जटिल होती हैं।

४. मैं बिना मैकअप के घर से बाहर नहीं निकलती, आप जानते हैं, मैं एक महिला हूं।

शकीरा ः एक नजर

१। जन्म दो फरवरी १९७७ बेरेंक्विला (कोलंबिया)।

२। मां नीदिया रिपोल, लेबनानी पिता विलियम मेबरेक।

३। शकीरा का अरबी में अर्थ है-गरिमामयी स्त्री।

४। दुनिया की सौ सबसे हॉट सेलिब्रिटी में शामिल।

५। चैरिटी के जरिये उत्तरी कोलंबिया में गरीब बच्चों के स्कूल खोलना चाहती हैं।

६। यूनिसेफ की गुडविल एम्बेसेडर

७.स्पैनिश कंपनी के साथ कॉस्मेटिक्स प्रॉडक्ट्स की रेंज लांच की।

८. सन सिल्क के इंटरनेशनल एड में मैडोना और मर्लिन मुनरो के साथ।

९. हाइट पांच फुट दो इंच।

१०. वजन १०६ पौंड

16 comments:

cartoonist ABHISHEK said...

achchha hai.......

शिरीष कुमार मौर्य said...

रोचक पोस्ट!
पसन्द आपकी बहुत अच्छी है रवीन्द्र भाई !
मजा आया पढ़कर!

यारा said...

kya kehne ravi bhai...



wakai sundar likha hai....

gre8!

awdhesh pratap singh
Indore # 093292 31909

एस. बी. सिंह said...

पहले तस्वीर -
आग भीगी नहीं है पानी से ,
एक शोला नहा के निकला है।

और आलेख-
मैं तो फ़िदा हो गया। क्या लिखा है रवीन्द्र भाई । बहुत बढिया। अगर शकीरा का एक गीत भी पोस्ट कर देते तो क्या बात थी। शुक्रिया

bahadur patel said...

kya kiya hai apane abhi to samjh me nahin aa raha hai. itminan se padhkar likhunga.
mere blog par to padharen.

neera said...

गहरी रिसर्च कर डाली शकीरा पर और फ़िर सुंदर शब्दों में बाँध कर रूचिकर बना दिया..

Irshad said...

ब्लॉगिंग में जो नया लिखने वालों की जमात पैदा हो रही है उनमें से आप भी एक है। जो पूराने या परम्परावादी लेखन के बजाय नई लीक और यर्थात को सामने ला रहे है। शकीरा जैसे विषय पर सब हाथ नही आजमाते। हिन्दी में इस तरह के लिखने की बहुत जरूरत है। गुलजार की पक्तियां है कि '' जो भी लिखा है, दिल से लिखा है, ये लम्हा फिलहाल जी लेने दो।'' तुम जो लिख रहे हो वो सिर्फ लिखने के लिये ही नही बल्कि तुम उसे जी रहें है।

सुशील कुमार छौक्कर said...

फिदा होना मेरी फितरत है|
वाह क्या बात हैं। वैसे उनका डांस तो हमे भी पसंद हैं। शकीरा का अर्थ जानकर अच्छा लगा। एक अच्छी पोस्ट पढकर अच्छा लगा।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

रोचक जानकारी .......एक अच्छी पोस्ट

ravindra vyas said...

अभिषेकजी, शिरीष भाई शुक्रिया। अवधेश तुम्हें यह पसंद आया, आभार। सिंह साहब अगली पोस्ट शायद फिर शकीरा पर ही हो। मैं कोशिश करूंगा कि आपको उनका गीत पढ़वा दूं। नीराजी, बहादुर आप आए यहां, पढ़ा और रिएक्ट किया, अच्छा लगा। इरशाद भाई बहुत बहुत शुक्रिया। सुशीलकुमारजी और रंजनाजी आपके प्रति आभार।

ANIL YADAV said...

लाइक रिवाल्विन्ग पृथ्वी प्यूबिक गाइरेशनाय नमः। साहसिक। आपकी पेन्टिंग को समझने में मददगार साहसिक राइटअप।

ravindra vyas said...

शुक्रिया अनिल भाई।

श्रुति अग्रवाल said...

रवींद्र जी, शकीरा आज भी आपकी पसंद की फेहरिस्त में शुमार हैं.....आप शायद भूल गए होंगे मुझे याद है...सन 2001 में इंदौर भास्कर में मेरा पहला आर्टिकल। इंदौर पोस्ट के बोल्ड एंड ब्यूटीफुल के लिए किया गया पहला ट्रांसलेशन वह शकीरा पर ही था ...पुराने दिन अब भी याद आते हैं।

ravindra vyas said...

प्रिय श्रुति, कमेंट लिए शुक्रिया। लेकिन भास्कर में तुमने जो अनुवाद किए थे वे शकीरा के नहीं, क्रिस्टिना एग्यूलेरा और जेनिफर लोपेट गे किए थे। यदि तुम्हारे पास उसकी कटिंग हो तो उसे एक नजर देखो।

श्रुति अग्रवाल said...

कटिंग्स तो नहीं है आपकी हैडिंग जरूर जेहन में है वो थी "मदमस्त कर देनी वाली आवाज की मलिका " यहाँ मैं 100 प्रतिशत सही हूँ....क्योंकि मैं हैडिंग के मामले में कमजोर थी इसलिए आपकी दी हैडिंग्स डायरी में नोट कर लेती थी।

Atul Sharma said...

अत्‍यन्‍त सटीक शब्‍दों में शकीरा के बारे में संपूर्ण जानकारी देने के लिए शुक्रिया । आशा है कि भविष्‍य में भी विविध विषयों पर ऐसी ही जानकारी मिलेगी ।
-duniagoal.blogspot.com